बाली. जवाई बांध के जलग्रहण क्षेत्र में पानी से घिरी एक छोटी पहाड़ी पर देवगिरी माता के प्राचीन मंदिर का मार्ग पिछले एक महीने से बंद है। इस पहाड़ी पर करीब 100 लंगूरों का झुंड भी एक महीने से फंसा है। चारों तरफ पानी भरा होने के कारण वह कहीं आ जा नहीं पा रहे हैं। पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े जवाई बांध के जलग्रहण क्षेत्र की यह पहाड़ी करीब 20-25 फीट गहरे पानी से घिरी है। इन लंगूरों के लिए स्थानीय लोग रोज नाव से भोजन ले जाकर खिला हैं।
सितंबर के प्रथम सप्ताह में हुई बारिश से पहाड़ी पर मंदिर के आसपास पेड़-पौधों पर पत्तियां अंकुरित होने से बंदरों को भी खुराक मिल गई थी, जो अब या तो सूख गईं हैं या खत्म हो गई हैं। ऐसे में लंगूरों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया था। ऐसे में स्थानीय ग्रामीण इन लंगूरों को भोजन कराने में जुटे हुए हैं। भाटून्द गांव के संदीप दवे, मुकेश एन जानी, किशोर, ललित, किरण त्रिवेदी रविवार को नाव से इन बंदरों के भोजन के लिए आलू और रोठा (मोटी रोटी) लेकर पहाड़ी पर पहुंचे। उन्होंने बंदरों को आलू व रोठा खिलाए। पानी से घिरी पहाड़ी पर पहुंचने का नाव ही एकमात्र साधन है।
देवगिरी माता मंदिर के पुजारी पोसा राम देवासी की नाव से भी लंगूरों के लिए खाद्य सामग्री पहुंचाई जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि जवाई बांध का पानी साल में तीन-चार बार किसानों को सिंचाई के लिए दिया जाता है। अभी करीब एक पखवाड़े बाद पानी छोड़ा जाएगा। पानी छोड़ते ही पांच-छह दिन में पहाड़ी के पास भरा पानी कम हो जाएगा। इससे वहां फंसे लंगूर भी निकल पाएंगे। लंगूरों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में संबंधित सरकारी विभाग की ओर से कोई सहायता नहीं मिली है, लेकिन कई समाज सेवकों ने समय-समय पर बंदरों को खाना पहुंचा रहे हैं।